New Ishq Shayari 2026 in Hindi: Romantic Shayari Collection

Ishq Shayari 2026 in Hindi brings beautiful expressions of love, romance, and deep emotions. This collection includes romantic shayari, true love shayari, heart touching shayari, mohabbat shayari, 2 line ishq shayari, sad love shayari, love quotes, emotional shayari, and couple shayari to express the feelings of your heart.

तेरे इश्क़ में दिल कुछ ऐसा खो गया,
जो मेरा था, वो भी तेरा हो गया।

तेरी चाहत का नशा कुछ ऐसा चढ़ा,
हर ख्याल में बस तेरा चेहरा दिखा।

इश्क़ तेरा मेरी जिंदगी का सुकून है,
तू ही मेरी खुशी, तू ही मेरा जुनून है।

तेरी यादों में गुजरती है हर शाम,
दिल हर पल लेता है बस तेरा नाम।

तेरे साथ से जिंदगी हसीन लगती है,
तेरी मुस्कान से हर खुशी करीब लगती है।

इश्क़ की राह में बस तेरा साथ चाहिए,
हर जन्म में मुझे तेरा हाथ चाहिए।

तेरी आंखों में जो प्यार नजर आता है,
वही मेरे दिल को सबसे ज्यादा भाता है।

तुझसे मिला तो जाना इश्क़ क्या होता है,
किसी के लिए दिल बेकरार क्या होता है।

इश्क़ की खूबसूरत सी वजह हो तुम,
मेरी जिंदगी की सबसे प्यारी दुआ हो तुम।

तेरी मोहब्बत में कुछ खास बात है,
तू दूर होकर भी दिल के पास है।

तेरे नाम से शुरू मेरी हर बात है,
तू ही मेरी सुबह, तू ही मेरी रात है।

दिल ने तुझे अपना मान लिया है,
तेरी मोहब्बत को जिंदगी मान लिया है।

तेरी यादें दिल को सुकून देती हैं,
तेरी बातें चेहरे पर मुस्कान देती हैं।

इश्क़ तुझसे है और बेपनाह है,
तू ही मेरा सबसे खूबसूरत ख्वाब है।

तेरी चाहत में दिल मुस्कुराता है,
तेरा नाम आते ही सब भूल जाता है।

तू मेरी जिंदगी की वो खुशी है,
जिसके बिना हर खुशी अधूरी है।

तेरे साथ हर पल खास लगता है,
तेरे बिना दिल उदास लगता है।

मोहब्बत में तेरा साथ मिल जाए,
तो जिंदगी का हर गम मिट जाए।

जो बदल बदल के रस्ते मैं ये चल रहा हूँ अक्सर
कहीं बेदख़ल मुझे ख़ुद मेरा कारवाँ न कर दे

जो तेरा शबाब-ए-रंगीं मैं क़रीब आ के देखूँ
तेरी जिस्म का सुलगना मुझे आतिशां न कर दे

तेरे हुस्न की अदाएँ तेरी ज़ुल्फ़ की घटाएँ
बरबाद ये बलाएँ मेरा आशियाँ न कर दे

तेरी शबनमी लटों से जो टपक रही हैं बूंदें
मेरे शोला-ए-मोहब्बत को धुआँ धुआँ न कर दे

आना तुम्हारा बहार ले आता है ,
मेरा मन तब मेरा ही ना रह पाता है।

जितना तुम्हारा दीदार होता है ,
मुझे तुमसे इश्क़ उतनी बार होता है।

عشق وہ دریا ہے جس کی کوئی تہہ نہیں ملتی
جو ڈوب گیا، بس وہی کنارہ پا لیتا ہے۔

محبت وہ فلسفہ ہے جو لفظوں میں نہیں سماتا
یہ دل سے شروع ہو کر روح میں اتر جاتا ہے۔

میں نے عشق کیا تو زمانہ خفا ہوا
پر دل کو سکون پہلی بار ملا۔

کبھی خواب بن کے آیا، کبھی درد بن کے بسا
یہ عشق بھی کیا عجب تماشا ہوا۔

وہ باتیں جو لبوں سے نہ کہی جا سکیں
عشق سنتا ہے، خاموشیوں کی زبان سے۔

عشق وہ آگ ہے جو جلائے بھی، جگائے بھی
جو سچے دل میں لگے تو خدا دکھائے بھی۔

Ishq woh shola hai jo khud ko bhi jala deta hai,
Aur khaak se naya jahan bana deta hai.

Mohabbat sirf mehsoos ki jaati hai, kahi nahi jaati,
Yeh dil ki ibadat hai, rasm nahi.

Kabhi woh khwabon mein aaye, kabhi dua ban jaaye,
Yeh ishq bhi ajab andaaz dikha jaaye.

Maine jab ishq kiya, khud ko pehchaan liya,
Goya dil ne pehli baar insaan liya.

Ishq woh raaz hai jo labon pe nahi aata,
Yeh woh naghma hai jo dil chupke se gaata.

Woh ishq hi kya jo aazmaish na bane,
Jo dard de kar bhi roshni na bane.

Mohabbat mein haar jao to jeet hai yahi,
Dil se jo khaali ho, woh rooh nahi rehti.

इश्क़ को मैंने खामोशी में जीना सिखा दिया
लफ़्ज़ कम हो गए, मगर एहसास बढ़ा दिया

तुम पास नहीं फिर भी पास लगते हो
जैसे हवा में घुला कोई मीठा सा एहसास लगते हो

मैंने इश्क़ को किताबों में नहीं रखा
उसे अपनी साँसों में उतार लिया है

तेरी यादें भी अब गुलज़ार सी लगती हैं
जो दर्द देती हैं, वही प्यार सी लगती हैं

इश्क़ वो नहीं जो दिखाया जाए
इश्क़ वो है जो खामोशी में निभाया जाए

इश्क़ की हद नहीं कोई, बस तुझ तक सिमट गया है दिल
तू कभी मेरा नहीं हुआ, फिर भी तुझसे ही जुड़ गया है दिल

तू सामने रहा मगर कभी मेरा न हुआ
मैं तेरा होकर भी हमेशा अकेला ही रहा

तेरी हँसी को अपना समझ बैठे थे
हम तो इक तरफ़ा इश्क़ में खुद को खो बैठे थे

तुझे चाहना मेरी आदत बन गई है
और तू मेरी किस्मत से हमेशा दूर रह गई है

मैं रोज़ तुझे याद करता हूँ बिना बताए
और तू किसी और की दुनिया सजाती है हँसते हुए

तुम्हारा हो तो हो, लेकिन हमारा हो नहीं सकता
ये बस्ती-ए-इश्क़ है, यहाँ हर दिल एक जैसा नहीं होता

यह बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है
इसमें सब मुनाफ़ा है, ख़सारा हो नहीं सकता

तुझे मैं इश्क़ की ज़ंजीर पहना कर रखूँ
तेरी सूरत को निगाहों में बसा कर रखूँ

क्या कहूँ तुमसे कि क्या है इश्क़
बस इतना जान लो… सज़ा भी है और ख़ुदा भी है

नहीं होता किसी तबीब से इस मर्ज़ का इलाज
इश्क़ लाइलाज है… बस परहेज़ कीजिए

इश्क़ में डूब कर हमने ख़ुद को भुला दिया
तेरी यादों ने हर दर्द को सजा दिया
तू मिला तो लगा जैसे जहाँ मिल गया
वरना इस दिल ने तो जीना ही छोड़ दिया

तेरे इश्क़ का असर कुछ यूँ हुआ है
हर ख़्वाब में बस तेरा ही चेहरा बसा है
ना दिन का पता ना रात का एहसास
दिल ने तुझमें ही अपना जहाँ ढूँढ लिया है

इश्क़ वो नहीं जो लफ़्ज़ों में बयाँ हो जाए
ये वो एहसास है जो ख़ामोशी में भी नज़र आए
दिल से दिल तक का ये सफ़र अनोखा है
जो समझे वही सच्चा आशिक़ कहलाए

तेरी मोहब्बत ने हमें कुछ ऐसा बना दिया
हर दर्द को हमने हँसी में छुपा लिया
अब तो हर साँस में बस तेरा ही नाम है
तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरा जहाँ है

इश्क़ की राहों में अक्सर दर्द मिलता है
पर उसी दर्द में सुकून भी छुपा होता है
जो दिल से निभाए इस रिश्ते को
उसी को असली प्यार नसीब होता है

इश्क है तुमसे मेरी चाहत का हिसाब रख लेना

अगर हो सके तो मोहब्बत की किताब रख लेना

मिलूँगा तो अपने हर एक पल का हिसाब लूगाँ

तुम मेरे हर एक सवाल का जबाब रख लेना।

होना ही था ये इश्क हो गया है तुमसे

मोहब्बत का तार फिक्स हो गया है तुमसे,

बहुत सुकून था एक अकेले मोहब्बत में

अबतक तो और भी रिस्क हो गया है।

इश्क के नशे में मदहोश हो रहा हूँ

मुझको संभालो यारों होश खो रहा हूँ,

जबसे हुआ है कमबख्त इश्क मुझे

जगाता हूँ रात भर और कम सो रहा हूँ ।

तेरे इश्क़ ने मेरी दुनिया सजा दी है
तेरी मुस्कान ने मेरी ज़िंदगी बना दी है

तू पास हो तो हर लम्हा हसीन लगता है
तेरे बिना ये दिल अधूरा सा लगता है

तेरी बाहों में जो सुकून मिलता है
वो किसी जन्नत में भी नहीं मिलता है

तुझे देख कर दिल को करार आता है
हर दर्द बस तुझमें ही सिमट जाता है

तेरी मोहब्बत मेरी इबादत बन गई
तू ही मेरी चाहत, तू ही मेरी राहत बन गई

अधूरा इश्क़ मेरा तुझसे ही जुड़ा है,
तेरी यादों में ही बस मेरा दिल टूटा है।

तुझे पाना चाहा, पर मुकम्मल न हो सका,
इश्क़ अधूरा रह गया, बस दिल में रह गया।

तेरे बिना मेरी दुनिया अधूरी सी लगी,
इश्क़ का हर ख्वाब तुझसे ही टकराया।

तेरा नाम लूँ, दिल को सुकून मिले,
पर तेरे बिना ये इश्क़ कभी पूरा न हुआ।

अधूरी मोहब्बत की ये दास्तान है,
तेरी यादें ही अब बस पहचान है।

तेरी मुस्कान में खो गया दिल मेरा,
पर इश्क़ का सफर रहा अधूरा सा हमारा।

जब तू साथ नहीं होता, सब अधूरा सा लगे,
तेरी यादों में ही हमारा दिल बसे।

प्यार में हमने सब कुछ दे दिया,
पर तू मिला नहीं, अधूरा रह गया इश्क़ हमारा।

عشق کی خوبصورتی بھی عجیب ہے،
جس سے ہو جائے، وہی سب سے قریب ہے۔

تیری قربت کا نشہ کچھ ایسا ہے،
کہ دنیا کی ہر خوشی سے پیارا لگتا ہے۔

تجھے دیکھوں تو دل کو سکون ملتا ہے،
جیسے دعاؤں کا جواب ملتا ہے۔

یہ عشق بھی کتنا حسین احساس ہے،
دور رہ کر بھی دل تیرے پاس ہے۔

इश्क़ क्या है, ये पूछिए परवाने से,
ज़िंदगी जिसको मयस्सर हुई जल जाने से।

ये इश्क़ नहीं आसान, इतना ही समझ लीजिए,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं।

इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।

बाक़ी सब जाने दो, बताना ज़रा एक ऐब मेरा,
सिवा इसके कि तुमसे इश्क़ है बेख़ौफ़ है।

आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें,
इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें।

इश्क़ का तो पता नहीं,
पर तुम्हें देखते रहना दिल को सुकून देता है,
इसीलिए हर पल मेरे ख़्वाबों-ख़यालों में रहता है।

भटक जाते हैं लोग अक्सर इश्क़ की गलियों में,
इस सफ़र का कोई एक नक़्शा तो होना चाहिए।

थोड़ी जल्दी आया करो मिलने के लिए,
हमारा दिल नहीं बना तुमसे दूर रहने के लिए।

मुझे इ’श्क़ ने ये पता दिया कि न हिज्र है न विसाल है
उसी ज़ात का मैं ज़ुहूर हूँ ये जमाल उसी का जमाल है

अज़ीज़ सफ़ीपुरी
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इ’श्क़ माही दे लाइयाँ अग्गीं लग्गी कौण बुझावे हू
मैं की जाणाँ ज़ात इ’श्क़ जो दर दर जा झुकावे हू

सुल्तान बाहू
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हर तमन्ना इ’श्क़ में हर्फ़-ए-ग़लत
आ’शिक़ी में मा’नी-ए-हासिल फ़रेब

ज़हीन शाह ताजी
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इन्दर कलमा कल-कल करदा इ’श्क़ सिखाया कलमा हू
चोदाँ तबक़े कलमे अंदर छड किताबाँ अलमाँ हू

सुल्तान बाहू
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जिस मंज़ूल नूँ इ’श्क़ पहुँचावे, ईमान ख़बर न कोई हू
इ’श्क़ सलामत रक्खीं ‘बाहू’ देयाँ ईमान धरोई हू

ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਣ ਬਣ ਗਿਆ ਏਂ,
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਹਰ ਪਲ ਅਧੂਰਾ ਜਿਹਾ ਲੱਗਦਾ ਏ।

ਇਸ਼ਕ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਐਨਾ ਗੂੜ੍ਹਾ ਹੋ ਗਿਆ ਏ,
ਦੂਰੀ ਵਧੀ ਤਾਂ ਪਿਆਰ ਹੋਰ ਵੀ ਵਧ ਗਿਆ ਏ।

ਤੇਰੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਜਹਾਨ ਵੇਖਦਾ ਹਾਂ,
ਤੂੰ ਹੱਸੇ ਤਾਂ ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ੀ ਵੇਖਦਾ ਹਾਂ।

ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਹਰ ਰਾਹ ਸੋਹਣਾ ਲੱਗਦਾ ਏ,
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਤਾਂ ਦਿਲ ਵੀ ਉਦਾਸ ਰਹਿੰਦਾ ਏ।

Every moment without you feels like a story unfinished, my love.
The chapters are incomplete, and so is my heart.
In your absence, my heart is a puzzle with missing pieces,
And I’m waiting for you to complete it.


Adhura pyar ka dard to har koi samajhta hai,
Lekin koi nahi samajhta ki pura pyar kahan chhupa hota hai.


I’m writing my love story,
But you’re the ending I can’t find.


The most painful feeling is when the love you want doesn’t come back to you.
The rest of the world doesn’t understand.


Every night I look at the stars, and wonder if you’re looking at them too,
Thinking about the same unfinished love.

मै भी तुम्हारे इश्क़ में मशहूर हो गया हूँ
तुमसे दिल लगाने को मजबूर हो गया हूँ
अब और न तड़पाओ अपने इस दीवाने को
पहले जुदाई में टूट के चूर-चूर हो गया हूँ।

तेरे इश्क़ की गली से नज़र हटती नहीं है
बेचैन हूँ रात भर, रात कटती नहीं है,
परिंदों की तरह परवाज़ करना है मुझे
लेकिन धुंध तेरी चाहत की छँटती नहीं है।

मै भी इश्क़ कोई गुनाह कर रहा हूँ
टूट के चाहता हूँ तुम्हें, आगाह कर रहा हूँ
मेरे इस चाहत का कुछ तो सिला मिले
हर रात तेरी याद में खुद को तबाह कर रहा हूँ।

कोरोना सा हो गया है इश्क़ भी मेरा,
जिसे हुआ वो बस उसी का होकर रह गया।

दूरी का दौर था, मगर इश्क़ कम न हुआ,
फासले बढ़ गए, दिलों का रिश्ता कम न हुआ।

कोरोना ने सिखाया दूर रहना ज़रूरी है,
इश्क़ ने बताया दूर रहकर भी मोहब्बत पूरी है।

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का,
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।

इश्क़ से तबीयत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया,
दर्द की दवा पाई, दर्द-ए-बे-दवा पाया।

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।
— मिर्ज़ा ग़ालिब

काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ, मुश्ताक़-ए-शहादत भी हूँ,
काश मिल जाए तेरी तेग़ का ज़ुन्नार कहीं।
— हातिम अली मेहर

काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या दैर-ओ-हरम से मतलब,
जिस तरफ़ तू है उधर ही हमें सज्दा करना।
— हफ़ीज़ जौनपुरी

इश्क़ का बंदा भी हूँ, काफ़िर भी हूँ, मोमिन भी हूँ।
— सिराज लखनवी

इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के।

— मिर्ज़ा ग़ालिब

शायरी झूठ सही, इश्क़ फ़साना ही सही
ज़िंदा रहने के लिए कोई बहाना ही सही।

— समीना राजा

हमें माशूक़ को अपना बनाना तक नहीं आता
बनाने वाले आईना बना लेते हैं पत्थर से।

— सफ़ी औरंगाबादी

तू मेरी जान है, तू मेरी पहचान है,
तेरे बिना हर सुबह वीरान और अनजान है।

घर को घर तूने बनाया, वरना था बस मकान,
तेरी मौजूदगी से मिली इस ज़िंदगी को पहचान।

जो दिन तेरे साथ गुज़रा वो सबसे खास था,
जो रात तेरे बिना बीती वो लम्हा उदास था।

तेरी हँसी में छुपा है मेरा सारा जहान,
तू पास हो तो हर मुश्किल लगे आसान।

तू एटीट्यूड वाली है, पर दिल की साफ़ है,
तेरे जैसी बीवी पाना असल में नसीब की बात है।

तेरी चाहत में हर दर्द भी प्यारा लगता है,
तेरे बिना ये दिल अधूरा-अधूरा लगता है।

तेरा इश्क़ मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत वजह है,
तू साथ रहे तो हर खुशी मेरे पास है।

तेरे इश्क़ में हर इम्तिहान मंज़ूर है,
क्योंकि तेरा साथ ही मेरे लिए सबसे ज़रूरी है।

عشق نے غالبؔ نکما کر دیا
ورنہ ہم بھی آدمی تھے کام کے

یہ عشق نہیں آساں اتنا ہی سمجھ لیجے
اک آگ کا دریا ہے اور ڈوب کے جانا ہے

محبت میں نہیں ہے فرق جینے اور مرنے کا
اسی کو دیکھ کر جیتے ہیں جس کافر پہ دم نکلے

کچھ تو مجبوریاں رہی ہوں گی
یوں کوئی بے وفا نہیں ہوتا

تم محبت کو کھیل کہتے ہو
ہم نے برباد زندگی کر لی

اتنی ملتی ہے مری غزلوں سے صورت تیری
لوگ تجھ کو مرا محبوب سمجھتے ہوں گے

چند کلیاں نشاط کی چن کر مدتوں محو یاس رہتا ہوں
تیرا ملنا خوشی کی بات سہی تجھ سے مل کر اداس رہتا ہوں

عقل کو تنقید سے فرصت نہیں
عشق پر اعمال کی بنیاد رکھ

इश्क के जंगल में ऐसा ही होता है,
शिकारी खुद ही शिकार हो जाता है!

इश्क के ख्याल बहुत है, इश्क के चर्चे बहुत है,
सोचते है हम भी कर ले इश्क, पर सूना है इश्क में खर्चे बहुत है!

वो छन छन कर के आई, वो छम छम  कर के चली गई,
में सिंदूर ले कर खड़ा था, वो राखी बाँध कर चली गई!

अजब सी हालत है तेरे जाने के बाद,
मुझे भूख लगती नहीं, खाना खाने के बाद,
मेरे पास दो ही समोसे थे जो मैंने खा लिए,
एक तेरे आने से पहले, एक तेरे जाने के बाद!

इश्क हाजिर है मोहब्बत की सजा पाने को,
मटर-पनीर बना के रखना हम आ रहे है खाने को!

मोहब्बत करनी आती है, नफ़रतों का कोई ठौर नहीं,
बस तू ही तू है इस दिल में, दूसरा कोई और नहीं।

इस कदर शुमार है दीदार-ए-तालब उनका,
सौ बार भी मिल जाए… अधूरा लगता है।

पहला इश्क़ कभी पुराना नहीं होता,
वो हमेशा दिल में नया रहता है।

पहला इश्क़ वो होता है जो भुलाया नहीं जाता,
चाहे उम्र भर गुज़र जाए, दिल से मिटाया नहीं जाता।

वो पहली नज़र का असर अभी तक है,
वो पहली मुस्कान दिल में बसी हुई है,
पहला इश्क़ था मेरा तुमसे,
और आज भी ये चाहत अधूरी-पूरी है।

पहले इश्क़ की यादें आज भी ताज़ा हैं,
वो छोटी सी मुलाक़ातें आज भी दिल को सज़ा हैं,
हमने चाहा था तुझे बिना किसी शर्त के,
और वो पहला इश्क़ आज भी हमारी रज़ा है।

पहली मोहब्बत में डर भी था और हिम्मत भी,
आँखें मिलाने में शर्म भी थी और चाहत भी,
वो लम्हे अब यादों में जीते हैं,
पर दिल आज भी उसी पल में धड़कता है।

पहला इश्क़ मासूम था, पहला इश्क़ ख़ास था,
उसमें न कोई शर्त थी न कोई एहसास कम था,
बस दिल ने कहा और हम चलते गए,
वो पहला इश्क़ ज़िंदगी का सबसे हसीन एहसास था।

पहले इश्क़ ने सिखाया है हमें,
कि दिल लगाना आसान नहीं होता,
जो एक बार दिल दे बैठे,
वो फिर कभी वापस नहीं लेता।

पहले इश्क़ की कहानी सबसे प्यारी होती है,
हर याद में एक अलग ही ख़ुशबू होती है,
हम भूल गए दुनिया की सारी बातें,
बस वो पहली नज़र आज भी हमारी है।

वो बरसात का दिन, वो भीगी सड़क,
वो तेरा हाथ मेरे हाथ में आना,
पहला इश्क़ था वो, याद है मुझे,
जब दिल ने पहली बार धड़कना सिखाया।

पहला इश्क़ शायरी हिंदी में लिखना मुश्किल है,
क्योंकि वो एहसास लफ़्ज़ों में आता नहीं,
बस दिल जानता है उस पहली धड़कन को,
जो आज भी किसी के नाम से रुक जाती है।

कोन से लफ़्ज़ में मैं दर्द की सदा लिखूँ,
किस तरह मैं अपने ही दिल को बेवफ़ा लिखूँ।

किन लफ़्ज़ों में बयाँ करूँ दर्द-ए-दिल को मैं,
सुनने वाले बहुत हैं, समझने वाला कोई नहीं।

लोग कहते हैं हम मुस्कुराते बहुत हैं,
और हम थक गए हैं दर्द छुपाते-छुपाते।

सुना है काफ़ी पढ़-लिख गए हो तुम,
कभी वो भी तो पढ़ो जो हम कह नहीं पाते।

कसूर तो बहुत किए ज़िंदगी में,
पर सज़ा वहाँ मिली जहाँ बेकसूर थे हम।

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला

— बशीर बद्र

ऐ दोस्त हमने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी-कभी

— नासिर काज़मी

इज़हार-ए-इश्क़ उससे न करना था शेफ़्ता
ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया

— मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

दोस्ती इश्क़ और वफ़ादारी
सख़्त-जाँ में भी नर्म-गोशे हैं

— शीन काफ़ निज़ाम

दोस्ती का दावा किया, आशिक़ी से क्या मतलब
मैं तेरे फ़क़ीरों में, मैं तेरे ग़ुलामों में

— शोएब बिन अज़ीज़

तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो
मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो

तुम्हारे बाद भला क्या हैं वादा-ओ-पैमाँ
बस अपना वक़्त गँवा लूँ अगर इजाज़त हो

तुम्हारे हिज्र की शब-हाए-कार में जानाँ
कोई चराग़ जला लूँ अगर इजाज़त हो

किसे है ख़्वाहिश-ए-मरहम-गरी मगर फिर भी
मैं अपने ज़ख़्म दिखा लूँ अगर इजाज़त हो

तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू अभी कुछ
अपना हाल संभालूँ अगर इजाज़त हो

इश्क़ समझे थे जिस को वो शायद
बस एक ना-रसाई का रिश्ता था

मेरे और उस के दरमियान निकला
उम्र भर की जुदाई का रिश्ता

मर मिटा हूँ ख़याल पर अपने
वज्द आता है हाल पर अपने

अभी मत दीजिए जवाब कि मैं
झूम तो लूँ सवाल पर अपने

उम्र भर अपनी आरज़ू की है
मर न जाऊँ विसाल पर अपने

एक अता है मेरी हवस-निगाही
नाज़ कर ख़ुद-ओ-ख़ाल पर अपने

अपना शौक़ एक, हिला-साज़ आओ
शक है इस को जमाल पर अपने

जाने इस दम वो किस का मुमकिन हो
बहस मत कर महाल पर अपने

तेरे बिना ये दिल वीरान हो गया,
हर खुशी का रंग फीका हो गया,
अब तेरी यादों में ही मेरा जहाँ खो गया।

तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगती है,
हर धड़कन में सिर्फ तेरी कमी खलती है।

इश्क़ किया था दिल से, पर मंज़िल न मिली,
हर कदम पर तन्हाई की सज़ा मिली,
अब तेरे बिना ये ज़िंदगी अधूरी सी लगी।

इश्क़ में हम रोए भी बहुत और हँसे भी बहुत,
मगर सबसे ज़्यादा दर्द तब हुआ जब हम अकेले रह गए।

कहते हैं इश्क़ भूल जाता है,
पर सच तो ये है… दर्द कभी नहीं जाता।

तू मेरे साथ था तो दुनिया खूबसूरत थी,
अब तू नहीं… तो सब खाली-खाली सा लगता है।

नाकाम-ए-इश्क़ हूँ, सो मेरा देखना भी देख
कम देखता हूँ और ग़ज़ब देखता हूँ मैं

इश्क़ के नशे में मदहोश हो रहा हूँ
मुझको संभालो यारों, होश खो रहा हूँ
जबसे हुआ है कमबख़्त इश्क़ मुझे
जगाता हूँ रात भर और कम सो रहा हूँ।

हुस्न से शरह हुई इश्क़ के अफ़साने की
शमा लौ दे के ज़बाँ बन गई परवाने की

हुस्न का तालिब अगर है इश्क़ के आज़ार खींच
सदमा-ए-हिज्र मसीहा ऐ दिल-ए-बीमार खींच

न पाक होगा कभी हुस्न-ओ-इश्क़ का झगड़ा
वो क़िस्सा है ये कि जिसका कोई गवाह नहीं

बाहम जो हुस्न-ओ-इश्क़ में याराना हो गया
कोई परी बना कोई दीवाना हो गया

हुस्न और इश्क़ को फ़र्क़-ए-नज़री क्यों कहिए
मय की तासीर को इक बेख़बरी क्यों कहिए

हुस्न-ए-कामिल है तेरा, इश्क़ है कामिल मेरा
है मेरे बाग़-ए-सुख़न के लिए तू बाद-ए-बहार

आँख जो कुछ देखती है, लब पे आ सकता नहीं
माहव-ए-हैरत हूँ कि दुनिया क्या से क्या हो जाएगी

काफ़िला-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा का सालार है इक़बाल
किताब-ए-ख़ुदी का अनोखा किरदार है इक़बाल

इल्म-ओ-हिकमत, फ़लसफ़ा-ओ-इश्क़-ओ-अदब
क़ुदरत का नायाब ही शाहकार है इक़बाल

तू मेरा सुकून भी, बेकरारी भी
मेरी हँसी भी, उदासी भी

तेरी आँखों में सच्चाई है
मेरे दिल की गहराई है

इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं

मोहब्बत वह चिराग है जो अंधेरों को मिटाता है
यही ताकत है जो इंसान को खुदाई सिखाता है

खुदी को कर बुलंद इतना कि हर जज़्बा जवाँ हो
फिर मोहब्बत भी इबादत का करीना बन जाए

तेरी क़ुरबत में ही जलवा है खुदाई का मुझे
तेरी चाहत ने बनाया है मुसाफ़िर रोशनी का

इश्क़ वह आग है जो जलाए भी, जगाए भी
जो सच्चे दिल में लगे तो ख़ुदा दिखाए भी

मोहब्बत एक राज़ है जो शब्दों में नहीं समाता
यह दिल का दरिया है, जो हर साहिल से आगे बहता है

किताब-ए-इश्क़ में साये का मतलब
दर-ओ-दीवार का साया नहीं है

शहनवाज़ फ़ारूक़ी

किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
पर आँसुओं को हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत समझ

उमैर नज्मी

किताब-ए-इश्क़ के जो मोतबर रिसाले हैं
उन्हें मैं हुस्न के कुछ मुस्तनद हवाले हैं

अंजुम बाराबंकवी

किताब-ए-इश्क़ लिख रखी है दिल पर
मगर डरता हूँ फिर भी इम्तिहान से

सईद अहमद अख़्तर

Ishq Ki Gehraai Ko Kaun Samajh Paaya Hai
Jisne Kiya Hai Wahi Bas Muskuraya Hai

Tere Ishq Mein Ye Dil Nadaan Ho Gaya
Har Khwaab Mein Bas Tera Naam Ho Gaya

Ishq Wo Aag Hai Jo Bujhti Nahi
Dil Ki Baat Hai Jo Kisi Se Kehti Nahi

Teri Mohabbat Ka Asar Kuch Aisa Hua
Har Dard Bhi Ab Humein Pyaara Sa Laga

Ishq Mein Haar Bhi Jeet Lagti Hai
Jab Saamne Teri Ek Jhalak Milti Hai

ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਾਂਗੇ ਜਲਦੀ ਤੋਂ ਜਲਦੀ ਮੁੜ ਆਵਾਂਗੇ,
ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ ਦੁਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਯਾਦ ਰੱਖਣਾ ਸਾਨੂੰ।

ਇਸ਼ਕ ਹੈ ਜਾਂ ਇਬਾਦਤ, ਹੁਣ ਕੁਝ ਸਮਝ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ,
ਇੱਕ ਖੂਬਸੂਰਤ ਖ਼ਿਆਲ ਹੋ ਤੁਸੀਂ, ਜੋ ਦਿਲ ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ।

ਬਾਹਾਂ ਜਦੋਂ ਤਰਸਦੀਆਂ ਨੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸੀਨੇ ਨਾਲ ਲਾਉਣ ਨੂੰ,
ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਤਕੀਆ ਸਮਝ ਕੇ ਅਕਸਰ ਗਲੇ ਲਾ ਲੈਂਦਾ ਹਾਂ।

ਬੇਨਾਮ ਮੁਹੱਬਤ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਰੱਖੀ ਹੈ,
ਤੇਰੀ ਚਾਹਤ ਸੁਪਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਜਾ ਰੱਖੀ ਹੈ,
ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਬਦਲੇ ਪਰ ਤੂੰ ਨਾ ਬਦਲੀਂ,
ਇਹ ਉਮੀਦ ਸਿਰਫ਼ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਲਾ ਰੱਖੀ ਹੈ।

ਗ਼ਮ ਨਹੀਂ ਕਿ ਤੈਨੂੰ ਪਾ ਨਹੀਂ ਸਕੇ, ਖੁਸ਼ੀ ਹੈ,
ਇਸ਼ਕ ਹੋਇਆ ਤੈਥੋਂ, ਹੋਇਆ ਤੇ ਲਾਜਵਾਬ ਹੋਇਆ।

ਕੁਝ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਤਰ ਗਏ ਹੋ ਮੇਰੀ ਰਗ-ਰਗ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ,
ਕਿ ਖੁਦ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਹਿਸਾਸ ਤੁਹਾਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

इश्क़ वह दरिया है जिसमें डूबना भी सुकून है
निकलना चाहो तो भी किनारा नहीं मिलता

जब रूह में उतर जाता है बेपनाह इश्क़ का समंदर
लोग ज़िंदा तो रहते हैं पर किसी और के अंदर

इश्क़ का पहला कदम ही आख़िरी कदम होता है
फिर वापसी का रास्ता नहीं मिलता

इश्क़ में न बुद्धि काम आती है
न कोई समझाने से समझ आती है

इश्क़ का मापदंड न शब्द है, न अदा
यह तो दिल की वह खामोश दुआ है

दीदार-ए-यार की हसरत दिल में लिए बैठे हैं
वो सामने आए तो ज़माना भूल जाएँगे

तेरे दीदार की तलब कुछ ऐसी है
जैसे प्यासे को बारिश की तमन्ना हो

एक नज़र जो तेरी मुझ पर पड़ी
दिल ने फिर उम्र भर का इश्क़ कर लिया

तेरा दीदार हो जाए तो सुकून आ जाए
ये बेकरार दिल फिर कहीं क़रार पाए

चाय की गर्मी में तेरी यादों का स्वाद है,
तेरा इश्क़ मेरी सुबह का सबसे अच्छा अंदाज़ है।

चाय का प्याला और तेरी मोहब्बत,
दोनों दिल को हर सुबह खिला देते हैं राहत।

जब तन्हा बैठूँ चाय के संग,
तेरे ख्यालों का इश्क़ मेरे दिल को भरता हर रंग।

चाय की चुस्की में तेरी हँसी का असर,
तेरे बिना इश्क़ भी लगे जैसे अधूरा सफ़र।

तेरी मोहब्बत जैसी चाय की गर्मी,
हर ठंडी सुबह में देती है सुकून की ख़ुशी।

इश्क़ में डूबा दिल और हाथ में चाय,
तेरी यादों में ही कटती है मेरी हर शाम।

चाय की महक में तेरा नाम बसाया,
तेरी मोहब्बत ने दिल को फिर से सजाया।

तुझसे बात हो और चाय का प्याला,
इश्क़ के हर लम्हे में लगे जैसे खुला ख़ज़ाना।

बुढ़ापे में भी इन में ‘इश्क़ का इम्कान बाक़ी है
रिटाइर हो गए फिर भी बदन में जान बाक़ी है

न कुर्सी है न ‘ओहदा है न अब पहचान बाक़ी है
सफ़ाया हो गया मज़मून का ‘उन्वान बाक़ी है

किनारे पर खड़ा महबूब चिल्लाता रहा फिर भी
भँवर में अपनी कश्ती है अभी तूफ़ान बाक़ी है

सियासत में सियासत-दाँ नहीं कुर्सी ज़रूरी है
नहीं मिलते उसे गाहक मगर दूकान बाक़ी है

ज़बाँ खुलवा नहीं सकता किसी क़ीमत पे वो हम से
अगर मुँह में बनारस का ज़रा सा पान बाक़ी है

वो हैं मक़रूज़ सर-ता-पा मगर दा’वत खिलाते हैं
ज़मीं-दारी की उन में आज तक कुछ आन बाक़ी है

‘नज़र’ ता’लीम के पेशे में हम कंगाल रहते थे
सियासत का हमारे वास्ते मैदान बाक़ी है

प्यार में जल्दबाज़ी न करें।
महबूब और भी सस्ते होंगे।

मरीज़-ए-इश्क़ का मरीज़ वो बुखार बताते हैं,
एक व्यक्ति को एक व्यक्ति द्वारा नहीं मारा जाता।

है अगर मोहब्बत तो आँखों में पढ़ लो,
ज़ुबान से इज़हार तो नुमाइश बन जाती है।

क्या ख़ाक तरक्की की है इस दुनिया ने,
इश्क़ के मरीज़ तो आज भी बे-इलाज बैठे हैं।

क्या किसी से शिकवा करें,
जब अपनी तक़दीर ही बेवफ़ा है।

تیرے بغیر دل کو قرار نہیں آتا
عشق میں تیرے ہر پل بہار آتا ہے

آنکھوں میں تیری تصویر بسی ہے
دل میں بس اک تیرا ہی نام رہا ہے

عشق نے مجھ کو دیوانہ بنا دیا
تیری یاد نے چین چرا لیا

محبت میں دل نے سب کچھ گنوا دیا
پھر بھی تیرا نام لبوں پہ رہا

دوری بھی کم نہ کر سکی یہ عشق
تیرے بغیر ہر سانس ادھوری لگے

تیری مسکراہٹ میری زندگی ہے
تیرا ساتھ ہی میری بندگی ہے

عشق کی راہ میں کوئی آسانی نہیں
پھر بھی تیرے لیے ہر درد قبول ہے

تیرا خیال دل میں چراغ سا جلے
اندھیروں میں بھی راہ دکھاتا رہے

عشق کوئی کھیل نہیں، یہ سچ ہے
یہ تو روح کا روح سے ملنا ہے

تیرے بنا یہ دنیا ادھوری لگے
بس تیرا ہونا ہی مکمل خوشی ہے

عشق میں دل نے ایسی داستان لکھی
تیرے نام سے ہر خوشی وابستہ کر دی

تیری یاد بھی اک نعمت ہے میرے لیے
دور رہ کر بھی تو پاس لگتا ہے مجھے

محبت نے سکھایا صبر کرنا مجھے
تیرے انتظار میں بھی سکون ملتا ہے

چاند بھی شرمائے تیری مسکراہٹ سے
میں کیسے نہ عاشق ہوں تیری ادا کا

دل کی زمین پر بس ایک نام لکھا ہے
وہ نام تیرا ہے، محبت کی نشانی

عشق آسان نہیں پر خوبصورت ضرور ہے
تیرے ساتھ ہر مشکل بھی آسان لگتی ہے

تیری آنکھوں میں ہے میری دنیا بسی
اک نظر میں سب کچھ مل جاتا ہے مجھے

محبت کوئی الفاظ کی محتاج نہیں
بس دل سے دل تک اک خاموش سا رشتہ ہے

تیرا ساتھ ہی میری سب سے بڑی دعا ہے
باقی زندگی میں کچھ اور نہیں چاہیے

عشق نے مجھے مکمل کر دیا ہے
تیرے بغیر ادھورا سا لگتا ہوں میں

عشق وہ دریا ہے جس کی کوئی تہہ نہیں ملتی
جو ڈوب گیا، بس وہی کنارہ پا لیتا ہے۔

محبت وہ فلسفہ ہے جو لفظوں میں نہیں سماتا
یہ دل سے شروع ہو کر روح میں اتر جاتا ہے۔

میں نے عشق کیا تو زمانہ خفا ہوا
پر دل کو سکون پہلی بار ملا۔

کبھی خواب بن کے آیا، کبھی درد بن کے بسا
یہ عشق بھی کیا عجب تماشا ہوا۔

وہ باتیں جو لبوں سے نہ کہی جا سکیں
عشق سنتا ہے، خاموشیوں کی زبان سے۔

عشق وہ آگ ہے جو جلائے بھی، جگائے بھی
جو سچے دل میں لگے تو خدا دکھائے بھی۔

ہم نے جب عشق کیا، خود سے جدا ہو گئے
یہ سفر خودی سے بیخودی تلک گیا۔

चलते तो है वो साथ मेरे पर अंदाज देखीए,
जैसे वो इश्क करके एहसान कर रहे है!

ये कैसा रिश्ता है तेरे और मेरे दरमियाँ,
फासलें भी बहुत है और मोहब्बत भी!

बहक ना जाए कही लौ की नियत,
होंठो से दिया तू बुझाया ना कर!

नींद भी नीलाम हो जाती है बाज़ार-ए-इश्क में,
किसी को भूल कर सो जाना आसन नहीं होता!

इश्क की कोई मंजिल नहीं होती,
बस सफ़र ही खुबसूरत होता है!

खुद से ज्यादा किसी और का हो जाना,
ना अब हमें ये किस्सा फिर नहीं दोहराना!

सुनो! तुम क्यों नहीं पढ़ते शायरी मेरी,
क्या तुम्हे मोहब्बत होने का ख़तरा है!

इश्क का भी अलग ही हिसाब है,
पलभर में हो जाता है उम्र भर के लिए!

फिर एक बार पड़ेंगे इश्क में जाना,
भरोसा ही तो उठा है, जनाजा नहीं!

ज़रा सा शुक्रिया तो करने दो इन नाजुक होंठो का,
सूना है बहुत तारीफ़ करते है हमेशा मेरे बारे में!

मोहब्बत में सुकून ढूँढने वाला बेख़बर था
कि ये आतिश तो दिल को और भड़काती है

तुझे पाने की ख़्वाहिश ने हमें ख़ाली किया
और इस ख़ालीपन ने हमें कायनात बना दिया

वो इश्क़ ही क्या जो ख़्वाब न जलाए
जो दिल को तोड़े, मगर सुकून दिलाए

तेरी चाहत ने हमें ज़ख़्म तो दिए बेशुमार
पर उन्हीं ज़ख़्मों से दिल ने नया रंग पाया है

इश्क़ में जो तकलीफ़ है वो भी प्यारी है
बिना इस दर्द के ज़िंदगी सूनी लगती है

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